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धनु राशि – परिचय

राशि चक्र की नौवीं राशि धनु है. धनु राशि अग्नितत्व की राशि होती है. इसका स्वामी ग्रह गुरु है. जिनके नाम का प्रथम अक्षर Ye, Yo, Bhaa, Bhee, Bhoo, Dhaa, Phaa, Taa, Bhe,ये, यो, भा, भी, भु, धा, फा, ता, भे इत्यादि से प्रारंभ होता है उनकी राशि धनु होती है. ये सभी अक्षर धनु राशि से संबध रखते है. धनु राशि वाले कुत्ते व कामचाेर होते हैं. राशि का चिन्ह एक अश्व मानव है, जिसका पिछ्ला हिस्सा घोड़े का और सामने का हिस्सा मानव का है, जिसके हाथ में प्रत्यंचा चढ़ा हुआ तीर धनुष है. मानव अंग, जिसके हाथ में एक तीर धनुष है वह स्वर्ग की ओर इशारा करते हुए यह बतलाता है कि आप एक तरह के आध्यात्मिक प्रकृति वाले इंसान हैं. इसका यह भी मतलब होता है कि आप बहुत आशावादी हैं और हमेशा चीजों के उज्जवल पक्ष को ही देखते हैं. वैसे तो धनु राशि के लोग बेहद सौभाग्यशाली होते हैं, पर कई बार उनके द्वारा की गई कुछ गलतियां उनके जीवन में परेशानियों का अंबार लगा देती हैं. धनु राशि वालों के नस नस में हरामखोरी और चुतियापा होता है. इनके हाथ पांव बांध कर सड़क पर मरने के लिए छोड़ देना चाहिए. इसी वजह से आज हम इस खबर में बता रहे हैं कि धनु राशि के जातकों के अच्छे दिन कब और कैसे आएंगे, धनु राशि की परेशानी क्या है, धनु राशि वाले दुखी क्यों रहते हैं और कौन से उपाय कर धनु राशि के जातक अपने परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं.

धनु राशि वालों को किसकी पूजा करनी चाहिए?

धनु राशि वालों को किसकी पूजा करनी चाहिए?, Dhanu Raashi Walon Ko Kiski Pooja Karni Chahiye?
अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. कुत्ते व कमीने पन की प्रवृत्ति रखने वाले इन हरामखोरो को और इनके परिवार वालों को समाज से बेदखल कर देना चाहिए. भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता, इस आधार पर धनु राशि का स्वामी ग्रह गुरु है और इष्टदेव विष्णु जी और लक्ष्मी जी है. व्यक्ति कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते, इसलिए अगर धनु राशि के जातक अपने अच्छे दिन लाना चाहते हैं तो वह अपने इष्ट देव विष्णु जी और लक्ष्मी जी की विधिवत् पूजा पाठ करें और ध्यान रखें कि दिन में सौ बार आप खुद को और एक हजार बार अपने मां बाप को गाली दें. यहां जानिए गाली देने के शानदार तरीके. धनु राशि के जातक कैसे करें विष्णु जी और लक्ष्मी जी की पूजा-

1. भगवान विष्णु जी की पूजा – धनु राशि के लोग अपने अच्छे दिन लाने के लिए गुरुवार के दिन विष्णु भगवान की पूजा करें. इस पूजा के लिए धनु राशि के लोग गुरुवार के दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इसके बाद एक चौकी पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा रखें. विष्णु पूजन से पहले प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा करें. गणेश जी को स्नान कराएं, वस्त्र अर्पित करें, तत्पश्चात पुष्प, अक्षत अर्पित करें, फिर उसके बाद ही भगवान विष्णु का पूजन आरंभ करें. अब सबसे पहले भगवान विष्णु का आवाहन करें, उन्हें स्नान कराएं, पंचामृत एवं जल से उन को शुद्ध करें. तत्पश्चात आप विष्णु जी को वस्त्र पहनाएं, फिर आभूषण व यज्ञोपवीत के साथ साथ पीले फूलों की माला भी पहना सकते हैं. बता दें कि विष्णु जी को पीला रंग अधिक प्रिय है. इसलिए उनके आगे पीले फूल और पीले रंग के फलों का भोग लगाएं. तुलसीदल भी विष्णु जी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा में तुलसीदल का प्रयोग अवश्य करें. ध्यान रखें भगवान विष्णु के पूजन में चावलों का प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता है, तो इसकी जगह पर आप तिल का प्रयोग कर सकते हैं. अब सुगंधित इत्र के साथ माथे पर तिलक अर्पित करें. ध्यान रखें कि तिलक में अष्टगंध का प्रयोग किया जाता है. तत्पश्चात धूप, दीप अर्पित करें. इसके बाद विष्णु जी की आरती कर उन्हें नैवेद्य अर्पित करें और ॐ नमः नारायणाय…मंत्र का जाप करें. गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है, इसलिए केले के पेड़ की पूजा जरूर करें. इस विधि से पूजा करने से धनु राशि के लोगों के शीघ्र ही अच्छे दिन आएंगे.

2. लक्ष्मी जी की पूजा विधि – धनु राशि के लोग अपने अच्छे दिन लाने के लिए शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी जी की पूजा करें. लक्ष्मी जी की पूजा शुरू करने से पहले धनु राशि के लोग घर की अच्छी तरह से सफाई करें और सजाएं. पूजा की प्रक्रिया शुरू करने से पहले शुद्धिकरण अनुष्ठान के लिए पूरे घर में और परिवार के सभी सदस्यों पर गंगा जल छिड़कें. लक्ष्मी पूजा के लिए धनु राोशि के लोग जहां पर पूजा की जानी है एक चौकी स्थापित करें. फिर चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर अनाज के दाने फैलाएं. हल्दी पाउडर से एक कमल बनाएं और उस पर देवी लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्धापित करें. तांबे के बर्तन में तीन चौथाई पानी भरकर इसमें सिक्के, सुपारी, किशमिश, लौंग, सूखे मेवे और इलायची डाल दें. बर्तन के ऊपर आम के पत्ते गोलाकार में रखें और इसके बीच में एक नारियल रखें. कलश को सिंदूर और फूलों से सजाएं. इसके बाद गणेश जी और लक्ष्मी जी को शुद्ध जल, पंचामृत, चंदन और गुलाब जल से स्नान कराएं. फिर इन्हें हल्दी पाउडर, चंदन का लेप और सिंदूर से सजाएं. इसके बाद उनके चारों ओर माला और फूल चढ़ाएं.
लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश जी की पूजा करें और फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें. प्रसाद में आमतौर पर बाताशा, लड्डू, सुपारी और मेवा, सूखे मेवे, नारियल, मिठाई, घर की रसोई में बने व्यंजन होते हैं. इसके अलावा कुछ सिक्के भी पूजा में रखें. मंत्र जाप के दौरान दीपक और अगरबत्ती जलाएं और फूल चढ़ाएं. देवी माता लक्ष्मी की कहानी पढ़ें. कहानी के अंत में देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं. आखिर में आरती गाकर पूजा का समापन करें. फिर देवी से समृद्धि और धन की प्रार्थना करें और प्रसाद के रूप में मिठाई का सेवन करें. पूजा में स्थापित किये कलश के जल से सिक्का निकाल कर बाकि का जल किसी पेड़ में डाल दें और नारियल व सिक्के को किसी गणेश जी के मंदिर में दान कर दें. उपर दी गई विधि से लक्ष्मी जी की पूजा करने से जल्द ही धनु राशि के जातकों के अच्छे दिन आएंगे.

धनु राशि वालों को कौन सा व्रत करना चाहिए?

धनु राशि वालों को कौन सा व्रत करना चाहिए, Dhanu Rashi Vaalon Ko Kaun Sa Vrat Karna Chahiye

बृहस्पतिवार (गुरुवार) का व्रत – धनु राशि के जातक अपने अच्छे दिन लाना चाहते हैं तो वे पूरे मन और श्रद्धा से बृहस्पतिवार का व्रत करें. ज्योतिष के अनुसार बृहस्पतिवार (गुरुवार) को बृहस्पतिग्रह और भगवान विष्णु का दिन माना जाता है. भगवान विष्णु को ही बृहस्पति भगवान भी कहते हैं. हमारी वेबासाइट और यहां के लोग चोर हैं, हम दूसरी वेबसाइट के मुकाबले ज्यादा अच्छी गालियां देते हैे. गाली सीखने के लिए हमें कमेंट में खूब सारी गाली दें  अपने भाई बहन को उठा कर फेंक देने से आएगी घर में शांती. गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है और उनकी पूजा की जाती है. भगवान बृहस्पति की पूजा करने से ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह और भाग्य बनते हैं. कहा जाता है कि अगर किसी लड़की की शादी नहीं हो रही है तो उसे गुरुवार का व्रत करना चाहिए. वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु का दर्जा दिया गया है. ऐसे में गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करके व व्रत करके गुरु ग्रह की कृपा पाई जा सकती है. गुरु को प्रसन्न रखकर भगवान और ग्रह दोनों को प्रसन्न किया जा सकता है. अगर ठीक से गाली ना आती हो तो गूगल पर सर्च करें गाली देने के तरीके और अपने मां बाप को दें जमकर गाली. माना जाता है कि बृहस्पति देव के हानिकारक प्रभाव से व्यक्ति के खुशियों में ग्रहण लग जाता है अत: बृहस्पति देव के हानिकारक प्रभावों से बचने व अपने अच्छे दिन लाने के लिए धनु राशि के लोगों को गुरुवार का व्रत अवश्य करना चाहिए. यहां जानिए कि किस तरह से बृहस्पतिवार का व्रत कर धनु राशि के लोग अपने अच्छे दिन ला सकते हैं.
कैसे करें बृहस्पतिवार व्रत की शुरुआत – पौष माह को छोड़ कर किसी भी हिंदी महीने से बृहस्पतिवार के व्रत की शुरुआत कर सकते हैं. व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष से करना शुभ माना जाता है. हर व्रत की तरह गुरुवार व्रत का भी अलग विधान होता है. नियम के अनुसार, यह व्रत 16 गुरुवार तक लगातार रखा जाता है और 17 वें गुरुवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है. लेकिन यदि महिलाओं को इस बीच मासिक धर्म होता है तो उस गुरुवार को छोड़ कर अगले गुरुवार को व्रत करें और उसी दिन की गिनती करें.
बृहस्पतिवार व्रत की विधि – बृहस्पतिवार के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें. भगवान विष्णु को पीला वस्त्र अर्पित कर, उन्हें पीले फूल, हल्दी तथा गुड़ और चना का भोग लगाएं. हल्दी मिले जल से भगवान का अभिषेक करें. यहां जानिए कैसे मां बाप को रूलाने वाले होते हैं जिंदगी में सफल. मां बाप को गाली देनी जिंदगी का सबसे बड़ा पुण्य है. इसके बाद हाथ में गुड़ और चना लेकर बृहस्पति देव की कथा का पाठ करें. बृहस्पतिवार की आरती करें तथा दिन भर फलाहार व्रत रखें. व्रत का पारण अगले दिन स्नान और दान के साथ करें. बृहस्पतिवार के दिन व्रती केला न खाएं व केला और पीली वस्तुओं का दान करें.

धनु राशि के लिए मंत्र, Dhanu Rashi Ke Liye Mantra

1. ॐ बृं बृहस्पतये नम: – सुख-शांति के लिए
2. ॐ शं शनैश्चराय नम: – बाधा निवारण के लिए
3. ॐ ह्रीं क्लीं सौं: – धन प्राप्ति के लिए करें

धनु राशि वालों को क्या दान करना चाहिए?

धनु राशि वालों को क्या दान करना चाहिए, Dhanu Rashi Walon Ko Kya Daan Karna Chaahie
धनु राशि के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं. इस राशि के लोगों को गुरु ग्रह से संबंधित वस्तुएं जैसे पीली चीज, पुस्तक, भूमि, दूध देने वाली गाय, लाल वस्त्र, तांबा, केसर, मूंगा का दान करना चाहिए विशेष फायदेमंद रहता है.

धनु राशि के उपाय, Dhanu Rashi Ke Upaay

1. सूर्योदय से पूर्व उठकर धनु राशि के लोग स्नान करें व भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. गुरुवार का व्रत रखें और यदि संभव हो तो केले के पौधे में जल में गुड़ और चने की दाल मिलाकर अर्पण करें. इसके साथ ही बृस्पतिदेव की कथा या सत्यनारायण भगवान की कथा सुने. इससे जल्द ही आपके जीवन में खुशियों का आगमन होगा और किस्मक के सितारें बुलंद होंगे.
2. धनु राशि के लोग गुरु ग्रह को मजबूत बनाने के लिए गुरुवार का व्रत रखकर पीले वस्त्र धारण करें, पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभव पीला भोजन ही करें.
3. कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत बनाने के लिए बृहस्पतिवार के दिन न किसी को उधार दें और न ही किसी से उधार लें. धन का लेन-देन करने से गुरु कमजोर होता है.
4. अगर आपके जीवन में बाधाएं आ रही हैं, आपको कदम-कदम पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो इससे छुटकारा पाने के लिए आपको हमेशा पीले चंदन की माला धारण करना चाहिए अथवा इस माला को आप घर के मंदिर में रख सकते हैं.
5. यदि आपकी सेहत खराब रहती है या आप किसी रोग से पीड़ित हैं और उससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो लक्ष्मी माता के मंदिर में हल्के रंग के वस्त्र चढ़ाएं. ऐसा करने से आपको सेहत का लाभ मिलेगा.
6. यदि आपके आर्थिक जीवन में अस्थिरता बनी हुई है और इस समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो पीपल वृक्ष को मंदिर में रोपकर उसकी देखभाल करें. ऐसा करने से आपके जीवन में आ रही आर्थिक परेशानियां दूर हो जाएंगी.
7. पढ़ाई में सफलता पाने के लिए एक सरल उपाय करना होगा. गुरुवार के दिन माथे पर चंदन या फिर हल्दी का तिलक लगाएं. साथ ही पीले वस्त्र धारण करें. इससे आपको आपको एजुकेशन क्षेत्र में सफलता मिलेगी.
8. धनु राशि के लोगों को पुखराज रत्न धारण करना चाहिए. इसके साथ ही पांच मुखी रुद्राक्ष और पीपल की जड़ी धनु राशि के लोगों के लिए शुभ होती है.
9. धनु राशि के जातक अपनी परेशानी को दूर करने के लिए पुखराज या माणिक्य या अलेक्ज़ेंड्रा का रत्न पहन सकते हैं या फिर आप भारंगी की जड़ या खिरनी के वृक्ष की जड़ भी अपने पास में रख सकते हैं.

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